Dca Ms Access in hindi

Dca Ms Access Unit 1st in hindi

Dca Ms Access Unit 1st in hindi

MS Access Notes in Hindi for DCA
UNIT- 1ST

डेटाबेस का परिचय (Introduction to database)- What is a Database
रिलेशनल डेटाबेस का प्रयोग क्यों किया जाता हैं (Why use a Relational Database)
डेटाबेस में की क्या होती हैं उनके प्रकार (What is Key in database and its types)
प्राइमरी की की अवधारणा (Concept of primary key relationship)
ऍम एस एक्सेस का परिचय (Introduction to MS Access) (Objects, Navigation).

डेटाबेस का परिचय (Introduction to database)- What is a Database
डेटा क्या है? (What is Data)
डेटा सूचना की विभिन्न छोटी इकाईयों का संग्रह है। इसका उपयोग text, numbers, media, bytes आदि विभिन्न रूपों में किया जा सकता है। इसे कागज में या इलेक्ट्रॉनिक मेमोरी आदि में संग्रहित किया जा सकता है।

‘डेटा’ शब्द की उत्पत्ति ‘डेटम’ शब्द से हुई है जिसका अर्थ है ‘सूचना का एक टुकड़ा’। यह डेटम शब्द का बहुवचन है।

Hierarchical Databases
Network Database
Object Oriented Database
Relational Database
NoSQL Database
डेटाबेस क्या है? (What is Database)
डेटाबेस हमारे जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा है। रोज़ हम ऐसी कई गतिविधियाँ करते हैं जिसमें डेटाबेस शामिल होता है | जैसे बैंक में, रेलवे स्टेशन में, स्कूल में, किराने की दुकान में, आदि। ये ऐसे उदाहरण हैं जहां हमें एक ही स्थान पर बड़ी मात्रा में डेटा स्टोर करने की आवश्यकता होती है।

डाटा के कलेक्शन को डेटाबेस कहा जाता है, जिसे संरचित डेटा (structured data) भी कहा जाता है।
इसे कंप्यूटर सिस्टम में एक्सेस या स्टोर किया जा सकता है।
इसे डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम (DBMS) के माध्यम से manage किया जा सकता है, जो डेटा को manage करने के लिए उपयोग किया जाने वाला सॉफ़्टवेयर है |
एक डेटाबेस में, डेटा को table में पंक्तियों (rows) और स्तंभों (Column) में व्यवस्थित किया जाता है ताकि डेटा को आसानी से Update, Expend और delete किया जा सके।
कंप्यूटर डेटाबेस में आम तौर पर विभिन्न डेटा रिकॉर्ड होते हैं जैसे एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में लेन-देन का विवरण, बिक्री और ग्राहक विवरण, छात्रों का शुल्क विवरण या किसी प्रोडक्ट का विवरण आदि
डेटाबेस कई प्रकार के होते हैं जैसे – relational database, distributed database, cloud database, NoSQL databases.
कंप्यूटर में डाटा को स्टोर करने के विभिन्न प्रकार के तरीके है ,जैसे – Data को Document के रूप में स्टोर कर सकते है, Worksheet के रूप में Store कर सकते है या फिर प्रोग्राम फाइल के रूप में स्टोर कर सकते है | Data को जब हम Row तथा Column में के रूप में Store करते है तो इसे Table कहते है | जब एक या एक एक से अधिक Tables को एक फाइल के रूप में स्टोर करते है तो इसे Database कहते है | अतः हम डेटाबेस को संछिप्त रूप से इस तरह परिभाषित करते है|

“The collection of Data in Rows and Columns format is known as database.”

एक डेटाबेस फाइल में एक या एक से अधिक Tables होती है प्रत्येक टेबल में एक या एक से अधिक रिकार्ड्स होते है | प्रत्येक रिकॉर्ड row तथा Columns का Combination होता है |

जैसे -: यदि किसी Student का डेटाबेस तैयार करना है तो इसमें Name, Add, Contact इसके Columns है | इन्हें Fields या Attribute भी कहते है | जब एक Student के Name, Add, Contact को इन फ़ील्ड्स में स्टोर करते है तब एक रिकॉर्ड पूरा होता है इसी तरह एक से अधिक Students के रिकॉर्ड को जब इसमें स्टोर करते है तब इसे एक टेबल कहते है | इसी तरह और टेबल Tables जैसे – Teacher, Library इत्यादि को भी डेटाबेस में Create कर सकते है |Dca Ms Access Unit 1st in hindi

डेटाबेस के प्रकार (Types of Database)
Hierarchical databases
Network databases
Object-oriented databases
Relational databases
NoSQL databases
Hierarchical Databases
Hierarchical Databases वह डेटाबेस होता है जिसमे डाटा को उनके Common Point या Link के आधार पर Rank या level के रूप में categorize किया जाता है | इसका मतलब किसी भी दो प्रकार के डाटा को हम lower rank में रखेंगे और इन दो प्रकारों में जप common होगा उस एंटिटी (Entity) को हम higher rank में रखेंगे | Hierarchical Databases को आप नीचे चार्ट के माध्यम से समझ सकते हैं |Hierarchical Databases Dca Ms Access Unit 1st in hindi

ऊपर दिए गए उदाहरण से आप समझ सकते हैं यहां पर डिपार्टमेंट और एडमिनिस्ट्रेशन दोनों अलग-अलग तथ्य (Entity) है लेकिन यह दोनों ही यूनिवर्सिटी के अंतर्गत आते हैं इसी प्रकार स्टूडेंट, वैकेंसी एंड सोर्सेस डिपार्टमेंट के अंतर्गत आते हैं |

Hierarchical Database में हम डाटा को parent-child relationship के आधार पर संगठित (organize) करते हैं | जिसमें child record को उनकी डाटा की प्रकति के आधार पर parent record से लिंक किया जाता है | एक parent record के कई child records हो सकते हैं |

Network Database
नेटवर्क डेटाबेस वह डेटाबेस होता है जिसमें किसी child records के एक से ज्यादा पैरंट रिकॉर्ड हो सकते हैं | इसमें चाइल्ड रिकॉर्ड स्वतंत्र रूप से कई पेरेंट्स रिकॉर्ड से जुड़े हुए हो सकते हैं |

उदाहरण के लिए नीचे दिए गए चार्ट में हम देख सकते हैं कि स्टूडेंट,फैकेल्टी और रिसोर्सेज के दो पेरेंट्स रिकॉर्ड क्लब और डिपार्टमेंट हैं | Network Database का एक नुक्सान यह है कि इस प्रकार के Database बहुत जटिल और structurally dependent होते हैं | इसलिए इसमें कोई भी बदलाव करना मुश्किल होता है |

 

Object Oriented Database
ऑब्जेक्ट-ओरिएंटेड डेटाबेस (OOD) एक डेटाबेस सिस्टम होता है जो ऐसे डेटा ऑब्जेक्ट्स के साथ काम कर सकता है जो बहुत जटिल या कठिन होते हैं। ऑब्जेक्ट-ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग में सब कुछ एक ऑब्जेक्ट के रूप में स्टोर होता है, और इनमें से कई ऑब्जेक्ट काफी जटिल होते हैं, जिनमें अलग-अलग Attributes और methods होती हैं।

जैसे कि नाम, पता या कोई रियल नम्बर इत्यादि जो ऑब्जेक्ट के characteristics होते हैं, इनको attribute कहा जाता है, जो कि एक ऑब्जेक्ट के रूप में स्टोर होते हैं। और methods ये बताते हैं, कि ऑब्जेक्ट का behavior कैसा है।

आईये इसको समझते हैं-

जैसे कोई टेबल ऑब्जेक्ट फॉर्म में है, और उसमें नाम, पता, एवं और भी जानकारी उस टेबल के Attributes हैं, तो methods उस टेबल के characteristics को बताती हैं, कि ये किस प्रकार का फंक्शन परफॉर्म करने वाला है।

OOD के साथ, डेटा ऑब्जेक्ट को डेटाबेस में उनकी सभी properties के साथ स्टोर किया जाता है।MS Access Notes in Hindi for DCA

जब आपका प्रोग्राम समाप्त हो जाता है, तो ऑब्जेक्ट OOD में स्टोर रहता है। जब आपका प्रोग्राम फिर से शुरू होता है, तो यह डेटाबेस से उसकी properties के साथ एक वस्तु को फिर से प्राप्त कर सकता है।

Relational Database
यह एक प्रकार का डेटाबेस है जो एक दूसरे से संबंधित डेटा पॉइंट्स को स्टोर और एक्सेस provide करता है। रिलेशनल डेटाबेस, रिलेशनल मॉडल पर आधारित होते हैं, जो किसी टेबल में डेटा को represent करने का बहुत ही सरल एवं सीधा तरीका है।

एक रिलेशनल डेटाबेस में, टेबल में प्रत्येक row में एक यूनिक आईडी के साथ रिकॉर्ड होता है। जिसमें प्रत्येक row “Primary Key” का use करके दूसरी row के साथ जुड़ी रहती है। टेबल के कॉलम में डेटा की विशेषताएँ (Attributes) होती हैं, और प्रत्येक रिकॉर्ड में सामान्यतः हर एक attribute के लिए एक value होती है, जिससे डेटा पॉइंट्स के बीच relation बनाना आसान हो जाता है।

डेटा को व्यवस्थित करने के लिए इस डेटाबेस को use करना किसी भी यूजर के लिए बहुत आसान है, इसलिए यह तरीका बहुत ज्यादा Popular है।

NoSQL Database
NoSQL डेटाबेस को समझने के लिए सबसे पहले ये जानना आवश्यक है, कि इस डाटाबेस की आवश्यकता क्यों पड़ी?

जैसा कि हम जानते हैं कि रिलेशनल डेटाबेस में एक structure के आधार पर ही आप कोई डेटा fill कर सकते हैं।

जैसे किसी टेबल में आप किसी व्यक्ति की जानकारी लिख रहे हैं। और यदि आपको उस व्यक्ति के address की जानकारी नहीं है, तो आप उस कॉलम को खाली नहीं छोड़ सकते हैं, आपको उसमें “NIL” या फिर डेस “-” लगाना पड़ेगा।

या फिर आप चाहते हैं कि इसमें अलग से कोई information fill की जाए तो उसमें अलग से कोई कॉलम ही उपलब्ध नहीं होता है। इस situation में आप डेटा को टेबल के structure के हिसाब से manage करेंगे। इसका सबसे बड़ा disadvantage यह है, कि बड़ी-बड़ी कंपनियों में अगर इस प्रकार से डेटा को मैनेज किया जाए तो, इसमें बहुत ज्यादा टाइम लगता है।

इन सब कमियों को दूर करने के लिए NoSQL Database का उपयोग किया जाता है। क्योंकि इसमें टेबल के structure के हिसाब से डेटा को मैनेज नहीं करना पड़ता। अगर किसी व्यक्ति के address के बारे में आपको जानकारी नहीं है, तो इसमें आप उस कॉलम को खाली छोड़ सकते हैं, या फिर आप कोई नई जानकारी को जोड़ना चाहते हैं तो ये भी कर सकते हैं।Dca Ms Access Unit 1st in hindi

NoSQL database की इन्ही विशेषताओं के कारण बड़ी-बड़ी कंपनियों एवं बिज़नेस में इसका सबसे ज्यादा उपयोग किया जाता है। NoSQL Databases के प्रकार

What is Relational database management system

Relational database management system एक डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम है जो रिलेशनल मॉडल पर आधारित है| एक डेटाबेस जिसमें डाटा टेबल में स्टोर होता है तथा उस डेटा के मध्य रिलेशनशिप भी टेबल में स्टोर होती हैं यह टेबल के फॉर्म्स को बिना बदले हुए सभी तरीकों से डाटा को एक्सेस किया जा सकता है|

रिलेशनल डेटाबेस में प्रयोग किया गया सॉफ्टवेयर रिलेशनल डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम के नाम से जाना जाता है| रिलेशनल डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम को RDBMS के नाम से भी जाना जाता है, रिलेशनल डेटाबेस बहुत शक्तिशाली है क्योंकि इसमें डाटा को डाटा बेस में स्टोर करना और इसे ऑपरेट करना आसान है| रिलेशनल डेटाबेस का अति आवश्यक फीचर यह है कि इसमें एक ही डेटाबेस में कई टेबल को स्टोर कर सकते हैं तथा सारी टेबल के डेटा के मध्य में रिलेशनशिप को स्थापित किया जा सकता है|अतः रिलेशनल डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम का एडवांसमेंट है| रिलेशनल डेटाबेस में एक डेटाबेस में प्रयोग MS Access, MS SQL, server Oracle इत्यादि मुख्य रूप से प्रयोग किए जाने वाले RDBMS सॉफ्टवेयर है|

रिलेशनल डेटाबेस का उपयोग क्यों (Why to use RDBMS)
RDBMS रिलेशनल डेटा मॉडल पर आधारित है इसमें डाटा को Row तथा Column के रूप में स्टोर किया जाता है और डेटाबेस में एक से अधिक टेबल के मध्य की रिलेशनशिप टेबल के रूप में स्टोर होती है RDBMS का प्रयोग करने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं

यह डाटा को टेबल के रूप में उपलब्ध कराता है|
इसमें डाटा को रो तथा कॉलम के रूप में भी स्टोर कर सकते है|
Row को यूनिक आइडेंटिटी Primary key के द्वारा उपलब्ध कर सकते है|
यह डाटा को शीघ्रता से वापस करने के लिए Index को क्रिएट करता है|
दो या दो से अधिक टेबल के बीच में रिलेशनशिप को स्थापित कर सकते हैं|
मल्टी यूजर एक्सेसिबिलिटी को उपलब्ध कराता है जिसे व्यक्तिगत यूजर्स के द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है|
Features of RDBMS

RDBMS के निम्नलिखित विशेषताएं होती है

Tabular data model – डीबीएमएस में डाटा को एक टेबल के रुप में रखा जाता है अतः इसे समझना बहुत ही आसान होता है साथ ही डाटा को बहुत आसानी से एक्सेस किया जा सकता है।
Standard language – RDBMS में डाटा पर कार्य करने के लिए एक स्टैंडर्ड लैंग्वेज जैसे SQL का प्रयोग किया जाता है, जो उपयोग करने में सरल है।
Parallel operations – RDBMS में एक साथ होने वाले parallel operations को सपोर्ट करता है।
Distributed database – RDBMS में उपलब्ध डाटा बेस को कंप्यूटर पर डिस्ट्रीब्यूट करके रखा जा सकता है।
Higher quality – RDBMS मे high क्वालिटी वाले रिलाएबल रूल्स का प्रयोग किया जाता है जिससे सिस्टम फेलियर की पॉसिबिलिटी कम हो जाती है।
Difference between DBMS and RDBMS
हालाँकि DBMS और RDBMS दोनों का उपयोग physical database में जानकारी स्टोर करने के लिए किया जाता है, लेकिन उनके बीच कुछ उल्लेखनीय अंतर हैं। DBMS और RDBMS के बीच मुख्य अंतर नीचे दिए गए हैं:

S.No, DBMS RDBMS
1 DBMS एप्लिकेशन डेटा को फाइल के रूप में स्टोर करते हैं। RDBMS एप्लिकेशन डेटा को एक सारणीबद्ध रूप में स्टोर करते हैं।
2 DBMS में, डेटा को आमतौर पर या तो एक hierarchical form में या navigational form में स्टोर किया जाता है। RDBMS में, टेबल्स में एक पहचानकर्ता होता है जिसे primary key कहा जाता है और डेटा वैल्यू टेबल्स के रूप में स्टोर होते हैं।
3 DBMS में Normalization मौजूद नहीं होता है। डीबीएमएस में Normalization मौजूद होता है।
4 डेटा हेरफेर के संबंध में DBMS कोई सुरक्षा लागू नहीं करता है। RDBMS ACID (Atomocity, Consistency, Isolation and Durability) प्रॉपर्टी के उद्देश्य के लिए integrity constraint को परिभाषित करता है।
5 DBMS डेटा स्टोर करने के लिए फाइल सिस्टम का उपयोग करता है, इसलिए टेबल्स के बीच कोई relation नहीं होगा। RDBMS में, डेटा वैल्यू को टेबल्स के रूप में स्टोर किया जाता है, इसलिए इन डेटा वैल्यू के बीच relationship टेबल के रूप में भी स्टोर किया जाएगा।
66 DBMS को स्टोर जानकारी तक पहुँचने के लिए कुछ समान तरीके प्रदान करने होते हैं। RDBMS सिस्टम डेटा की स्टोर जानकारी तक पहुँचने के लिए data और relationship के बीच tabular structure को सपोर्ट करता है।
7 DBMS distributed database को सपोर्ट नहीं करता है। DBMS distributed database को सपोर्ट करता है।
8 DBMS छोटे संगठन के लिए है और छोटे डेटा से निपटने के लिए है। यह single user को सपोर्ट करता है। RDBMS को बड़ी मात्रा में डेटा को संभालने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह कई यूजर को सपोर्ट समर्थन करता है।
9 डीबीएमएस के उदाहरण file systems, xml आदि हैं। RDBMS के उदाहरण हैं mysql, postgre, sql server, oracle आदि।
12 Rules of Dr Edgar Frank Codd

19 अगस्त 1969 में Dr Edgar Frank Codd ने IBM में एक रिलेशनल डेटाबेस का प्रिंसिपल प्रस्तुत किया जिसके अनुसार रिलेशनल डेटाबेस सिस्टम एक ऐसा डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम होता है जिसमें डाटा को एक टेबल (Relation) के रूप में रिप्रजेंट किया जाता है वही टेबल कि प्रत्येक record को tuple तथा कॉलम एट्रीब्यूट कहलाते हैं| टेबल की एक Row के अंतर्गत डेटाबेस के रिकार्ड्स को रखा जाता है|

RDBMS के लिए E.F. Codd ने 12 रूल्स को बनाया था जो यदि किसी डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम के द्वारा पालन किए जाते हैं तो उस डीबीएमएस को रिलेशनल डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम कह सकते हैं यह रूल्स निम्नलिखित हैं

EF Codd RDBMS Rules
The information rule – रिलेशनल डेटाबेस में उपलब्ध सभी सूचनाओं को एक टेबल के रूप में ही रखा जाना चाहिए।
Granted access – टेबल का नाम, प्राइमरी Key तथा कॉलम नेम इत्यादि के आधार पर डेटाबेस के प्रत्येक डाटा को एक्सेस किया जाए यह सुनिश्चित होना चाहिए।
Systematic treatment of null values – डेटाबेस में रिकॉर्ड को इन्सर्ट (Insert) करते समय हमारे द्वारा कई values को छोड़ दिया जाता है, जिन्हें रिलेशनल डेटाबेस में null values की तरह माना जाना चाहिए, null value न तो ब्लैंक स्पेस (Blank Space) होती हैं और ना ही जीरो होती है।
Comprehensive data sub language rule – प्रत्येक डेटाबेस के द्वारा कम से कम एक लैंग्वेज का सपोर्ट होना आवश्यक है सामान्यतः सभी RDBMS में एसक्यूएल (SQL – Structure Query Language) का प्रयोग किया जाता है।
Dynamic online catalog based on relational model – एक रिलेशनल डेटाबेस में डाटा को जिस प्रकार से एक्सेस किया जाता है उसी प्रकार से डेटाबेस के स्ट्रक्चर को भी एक्सेस करने की सुविधा होनी चाहिए।
View updating rule – रिलेशनल डेटाबेस में किसी टेबल के लॉजिकल रिप्रजेंटेशन के तरीके View कहलाते हैं प्रत्येक View द्वारा डाटा मैनीपुलेशन की एक समान Full Range का सपोर्ट किया जाना चाहिए।
High table insert update delete – रिलेशनल डेटाबेस में इंसर्ट अपडेट तथा डिलीट फंक्शन को डाटा के प्रत्येक ग्रुप पर अप्लाई किया जा सके, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
Physical data Independence – डेटाबेस से इंफॉर्मेशन को प्राप्त करने तथा उसमें स्टोर करने की फिजिकल मेथड यूजर से पृथक होनी चाहिए।
Logical data Independence – डेटाबेस की लॉजिकल संरचना अथवा टेबल में किए गए बदलाव जिसका प्रभाव डाटा viewing method पर नहीं पढ़ना चाहिए।
Integrity Independence – यूज़र द्वारा इनपुट किए जा रहे डाटा की इंटीग्रिटी को बनाए रखने के लिए डेटाबेस लैंग्वेज में आवश्यक constraints होना चाहिए।
Distribution Independence – एक रिलेशनल डेटाबेस में कार्य करते समय यूजर को पूरी तरह unaware होना चाहिए कि डेटाबेस डिस्ट्रिब्यूटेड है या नहीं।
Non Sub version rule – डेटाबेस लैंग्वेज के अतिरिक्त डेटाबेस के स्ट्रक्चर को चेंज करने का कोई भी अन्य रूल नहीं होना चाहिए।

What is Key in database?
किसी भी रिकॉर्ड की फील्ड यूनिक वैल्यू बनाने के लिए Keys का प्रयोग किया जाता हैं रिलेशनल डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम एसोसिएटेड एड्रेसिंग का प्रयोग करता है अर्थात यह Rows को वैल्यू के द्वारा आइडेंटिफाई तथा लोकेट करता है यूजर के लिए फिजिकल एड्रेस पारदर्शी होना चाहिए इसलिए रिलेशनल सिस्टम में keys की आवश्यकता होती है जो रिलेशनल डेटाबेस में टेबल की पंक्तियों को यूनिक रूप से आइडेंटिफाई कर सकती हैं

Types of Keys
Primary key
Candidate key
Composite key
Super key
Foreign key
1. Primary key
Primary key एक टेबल में प्रत्येक रिकॉर्ड को यूनिक रखने के लिए प्रयोग की जाती हैं इस key के attribute कभी चेंज नहीं होना चाहिए जैसे एक व्यक्ति का एड्रेस प्राइमरी Key का पार्ट नहीं होना चाहिए क्योंकि यह चेंज हो सकता है परंतु Employee code नहीं बदला जा सकता जब तक की वह व्यक्ति उस संस्था को ना छोड़ दें | प्राइमरी की किसी भी टेबल में यूनिक की होती है जो पूरे रिकॉर्ड को निरूपित करती है|Dca Ms Access Unit 1st in hindi

2. Candidate key
Candidate key, attribute का सेट या एक attribute होता है जो एक रिकॉर्ड को यूनिक रखने के लिए प्रयोग की जाती है यह attribute Candidate key कहलाते हैं इस तरह के case में Candidate key में से एक key को Primary key चुन लिया जाता है तथा शेष बचे हुए Candidate keys, alternate key कहलाती हैं एक टेबल में केवल एक ही प्राइमरी की होती है जबकि कैंडिडेट की एक से अधिक हो सकती हैं|

3. Composite key
कई Cases में जब हम डेटाबेस डिजाइन करते हैं तो हम टेबल बनाते हैं प्रत्येक टेबल में हम एक से अधिक कॉलम को के पार्ट Primary key की तरह प्रयोग करते हैं उन्हें composite key कहते हैं दूसरे शब्दों में जब एक रिकॉर्ड एक सिंगल फील्ड के द्वारा uniquely identified नहीं किया जा सकता तो ऐसे case में composite key प्रयोग की जाती हैं|

4. Super key
एक Super key एक एंटिटी के लिए एक या एक से अधिक एट्रिब्यूट का सेट होता है जिसकी combine value एंटिटी सेट में entity को यूनिक बनाती हैं एक एंटिटी सेट employee मैं एट्रिब्यूट का सेट employee name, address, contact number आदि को एक Super key की तरह प्रयोग किया जा सकता है|

5. Foreign key
फॉरेन की का प्रयोग एक टेबल की दूसरी टेबल के साथ रिलेशनशिप को स्थापित करने के लिए किया जाता है अर्थात एक टेबल की लिंक दूसरी टेबल के साथ बनाने के लिए किया जाता है जैसे हम Student के नाम से एक डेटाबेस को Create करना चाहते हैं इस डेटाबेस में स्टूडेंट तथा कोर्स के नाम से 2 टेबल क्रिएट करते हैं|MS Access Notes in Hindi for DCA

Difference between Primary key and Foreign key
Primary Key
Foreign Key
प्राइमरी की एक कॉलम या कॉलम का सेट होता है जो एक टेबल में एक रो को यूनिक बनाता है
एक टेबल में सिंगल प्राइमरी की हो सकती
प्राइमरी की यूनिक होती है प्राइमरी की नल नहीं हो सकती
प्राइमरी की एंटिटी इंटिग्रिटी पार ध्यान देती हैं
प्राइमरी की को पैरेंट की के नाम से भी जाना जाता है
Foreign Key
फॉरेन की एक कॉलम या कॉलम का सेट होता है जो दूसरी टेबल के एक प्राइमरी की या एक कैंडिडेट की को रेफर करता है
एक टेबल में एक से अधिक फॉरेन की हो सकते हैं
फॉरेन की नल हो सकती हैं
फॉरेन की referential इंटीग्रिटी पर ध्यान देते हैं
फॉरेन की को चाइल्ड की के नाम से जाना जाता है

 

Concept of Primary Key

Primary key

Primary Key किसी Table कि प्रत्येक Record या Row को Uniquely Identify करना सम्भव बनाता है। किसी Relation में Primary Key की वही भूमिका होती है, जो किसी Entity Identifier की होती है। Primary Key को Define करके हम ये तय करते हैं कि हमने जिस छोटे से छोटे Data को Database में Store किया है, हम उस छोटे से छोटे Data के टुकडे को भी फिर से प्राप्त कर सकेंगे।

जब हम Relational Database की बात करते हैं, तब किसी Database से किसी Data के छोटे से छोटे टुकडे को भी प्राप्त करने के लिए हमें सिर्फ तीन बातों की जानकारी होनी चाहिएः उस Table के नाम की, जिसमें Data Store है, उस Column के नाम की, जिससे हम Data को प्राप्त करना चाहते हैं और उस Row के Primary Key की, जिसके Column के Data को हम प्राप्त करना चाहते हैं।MS Access Notes in Hindi for DCA

यदि हर Row के लिए Primary Key Unique हो, तो हम इस बात के लिए Sure हो सकते हैं कि हम Exact Row से Data को Retrieve कर सकेंगे। लेकिन यदि हर Row Unique ना हो, तो हम एक से ज्यादा Rows को Retrieve करेंगे, जहां ये तय करना मुश्किल हो जाएगा, कि हमारा Required Data किस Row में है। चूंकि एक Primary Key हमेंशा किसी Record या Row को Uniquely Identify करने के लिए Define किया जाता है, इसलिए किसी भी Primary Key Column को Empty नहीं छोडा जा सकता या किसी Primary Key Field में NULL Store नहीं किया जा सकता है।

Null एक Special Database मान होता है, जिसका मतलब “Unknown” होता है। यदि हमारे Relation में केवल एक ही Record हो और हम Primary Key Filed को Null कर दें, तो कोई Problem Generate नहीं होती है, लेकिन जैसे ही हम उस Relation में दूसरा Record Enter करेंगे, हम Primary Key Fields के Uniqueness की Property को खो देंगे।

इसलिए हम कभी भी किसी Table के Primary Key Field को Null Assign नहीं कर सकते हैं। इस Constraint को Entity Integrity कहा जाता है और Database में जितनी बार भी Data Enter या Modify किया जाता है, DBMS Primary Key को Enforce करके Database पर Apply करता है, जिससे हर Record हमेंशा Unique बना रहता है।

हम किसी Primary Key Field में Duplicate Data Store नहीं कर सकते हैं। यदि हम एसा करने की कोशिश करते हैं, तो भी DBMS हमें एसा नहीं करने देता है, क्योंकि वह Primary Key के Constraint को Follow करता है, जिसके तहत एक Column में कभी भी Duplicate Values Store नहीं हो सकती है।MS Access Notes in Hindi for DCA

हम किसी भी Entity के उसी Attribute को किसी Relation में Primary Key के रूप में Identify कर सकते हैं, जिसकी निम्नानुसार दो विशेषताएं हों

  • Primary Key की Value कभी भी Change नहीं होती है। (Uniqueness)
  • Primary Key Column को Null नहीं रखा जा सकता है। (Not Null)

हम किसी Entity की किसी ऐसी Field को Primary Key Set नहीं कर सकते हैं, जिनका Repetition सम्भव हो। उदाहरण के लिए यदि हम किसी Customer Relations में Customer के Name Filed को Primary Key Set कर दें, तो DBMS में Enter किए एक नाम के एक ही व्यक्ति को Database में Store होने देगा। क्योंकि DBMS Primary Key Field में एक ही Value का Repetition नहीं करने देता है, जबकि एक ही नाम के दो Customer हो सकते हैं।MS Access Notes in Hindi for DCA

इसी तरह से हम उस Attribute को भी Primary Key Set नहीं कर सकते हैं, जो बार-बार Change होता है। इस स्थिति में किसी एक ही Entity के एक ही Instance को एक ही Relation में एक से ज्यादा बार Enter किया जा सकता है, जिससे Database की Consistency व Accuracy प्रभावित होती है।

Types of primary key

किसी relational table की primary key टेबल के प्रत्येक record को uniquely identify करता है। primary key दो प्रकार की होती है।

  • simple primary key
  • composite primary key

1.Simple primary key:-simple primary key केवल एक field से मिलकर बनी होतीहै।

Image result for Simple primary key

2. composite primary key:-composite primary key एक से ज्यादा fields से मिलकर बनी होती है।

Image result for Simple primary key

Primary key को define करना

  1. primary key अद्वितीय(unique) होती है।
  2. किसी भी टेबल में केवल एक ही primary key हो सकती है।
  3. ये single या multi column हो सकती है, multi column primary key को हम composite primary key कहते है।
  4. composite primary key में अधिकतम 16 column हो सकते है।
  5. यह null values को contain नही करती है।

Introduction of MS Access

Introduction of MS Access

डाटाबेस डेवलपमेंट के लिए MS Access एक महत्वपूर्ण और शक्तिशाली प्लेटफार्म है | MS Access माइक्रोसॉफ्ट कंपनी द्वारा तैयार किया गया एक डेटाबेस एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर है जिसके माध्यम से किसी भी कंपनी,संस्था आदि के बारे में हम ज्यादा से ज्यादा सूचनाओं को इकठ्ठा कर सकते है | तथा बाद में कोई भी विशिष्ट जानकारी जो की उस संस्था से सम्बंधित हो ,उसे प्राप्त कर सकते है | MS Access को हम “collection of database “ भी कह सकते है | इसके अंतर्गत निम्न ऑब्जेक्ट्स आते है |

Objects of MS Access

  • Table
  • Query
  • Form
  • Report
  • Macros
  • Page
  • Module

Table

किसी भी RDBMS के अंतर्गत टेबल एक महत्वपूर्ण ऑब्जेक्ट होता है |इसके अंतर्गत डाटा को रो और कॉलम में अरेंज करते है | विभिन्न प्रकार के रिकार्ड्स के कलेक्शन को टेबल कहते है |

“Table is a Collection of records “

About table in detail

Query

अगर हम simple language मे क्वेरी को समझना चाहे तो क्वेरी का मतलब होता है – Questions or doubt | अगर आपको किसी चीज से related doubt है या जानकारी की जरुरत है तो आप concerned department या person से जो प्रश्न पूछते है वो क्वेरी कहलाता है | इस प्रकार किसी जानकारी को प्राप्त करने के लिए पूछा गया प्रश्न क्वेरी कहलाता है |MS Access Notes in Hindi for DCA

एक डेटाबेस के अन्दर एक से अधिक टेबल्स होती है,इन टेबल्स के मध्य रिलेशनशिप create करके सूचना को प्राप्त किया जा सकता है टेबल के अन्दर कुछ सूचनाये इस तरह की भी होती है जिनकी आवश्यकता हमे बार -बार होती है,इसके लिए हमे उस टेबल को बार -बार प्रयोग करना होता है | MS Access Notes in Hindi for DCA MS Access में किसी टाइप के अन्दर से सिलेक्टेड फ़ील्ड्स की सूचना को हम अलग एक टेबल के रूप में रख सकते है, तथा जब भी हमे उस सूचना की आवश्यकता होती है हम अलग से टेबल के रूप में रखी गई उस इनफार्मेशन का प्रयोग कर सकते है | MS Access में यह queries के द्वारा implement किया जाता है |

About Query in Detail

Form

यह MS Access का तीसरा और महत्वपूर्ण ऑब्जेक्ट है इसके द्वारा हम डाटा को डेटाबेस में स्टोर करा सकते है,प्रिंट करा सकते है लेकिन मुख्यतः MS Access मे form का प्रयोग इनपुट के लिए किया जाता है ।

About Form in Detail

Report

MS Access में report एक ऑब्जेक्ट है जिसका प्रयोग आउटपुट को प्राप्त करने के लिए किया जाता है | रिपोर्ट डेटा को संगठित तरीके से display और print करने के लिए उपयोग की जाती है। रिपोर्ट काफी लचीली होती है इसमें हम एक सामान डेटाबेस को कई लेआउट और फॉर्मेटिग में देख सकते है |Dca Ms Access Unit 1st in hindi

About Report in Detail

Macros

मैक्रो एक टूल है जो आपके कार्यों को स्वचालित करता है, और फॉर्म, रिपोर्ट और कंट्रोल्स में कार्यक्षमता जोड़ने की अनुमति देता है। उदाहरण के लिए, यदि आप किसी फॉर्म में एक कमांड बटन जोड़ते हैं, तो आप बटन के ऑनक्लिक ईवेंट को मैक्रो में जोड़ते हैं| मैक्रो में उन कमांड्स को शामिल किया जाता है, जिन्हें आप हर बार क्लिक करने के दौरान शामिल करना चाहते है।इस तरह एक बटन पर क्लिक करते ही ही सारे कमांड रन हो जाएगे| मैक्रो हम किसी भी फॉर्म,टेबल ,रिपोर्ट ,आदि में ओपन कर सकते है |

Page

Page का आशय डेटाबेस को वेबपेज फॉर्मेट में अर्रेंज कर के देखने के लिए होता है इसका संबंध डेटाबेस मैनेजमेंट से नहीं होता |

Module

मॉड्यूल, यूजर द्वारा डिफाइन किये गए functions, subroutines, और VBA code में लिखे गए global variables का समूह है। इन ऑब्जेक्ट का उपयोग एक्सेस डाटाबेस में कहीं से भी किया जा सकता है।

 

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